Wounds of Words
संरोहति अग्नीना दग्धं वनं परशुना हतम् । वाचा दुरुक्तं बीभत्सं न संरोहति वाक्षतम् ॥
A forest burnt by fire grows back again, and one felled by the axe regrows too. But the wound inflicted by cruel words never truly heals.
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शब्दों का घाव
संरोहति अग्नीना दग्धं वनं परशुना हतम् । वाचा दुरुक्तं बीभत्सं न संरोहति वाक्षतम् ॥
आग से जला जंगल फिर उग आता है, कुल्हाड़ी से कटा जंगल भी फिर हरा हो जाता है, पर कटु वचनों से लगा घाव कभी नहीं भरता।
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शब्दांची जखम
संरोहति अग्नीना दग्धं वनं परशुना हतम् । वाचा दुरुक्तं बीभत्सं न संरोहति वाक्षतम् ॥
आगीने जळालेले जंगल पुन्हा उगवते, कुऱ्हाडीने तोडलेले जंगलही पुन्हा फुलते, पण कठोर शब्दांनी झालेली जखम मात्र कधीच भरून येत नाही.
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