Deities Enter the Body
अग्निर्वाग्भूत्वा मुखं प्राविशद्वायुः प्राणो भूत्वा नासिके प्राविशदादित्यश्चक्षुर्भूत्वाऽक्षिणी प्राविशद्दिशः श्रोत्रं भूत्वा कर्णौ प्राविशन्नोषधिवनस्पतयो लोमानि भूत्वा त्वचं प्राविशंश्चन्द्रमा मनो भूत्वा हृदयं प्राविशन्मृत्युरपानो भूत्वा नाभिं प्राविशदापो रेतो भूत्वा शिश्नं प्राविशन् ॥ ४ ॥
Fire became speech and entered the mouth. Wind became breath and entered the nostrils. The sun became sight and entered the eyes. The quarters of space became hearing and entered the ears. Plants and trees became body-hair and entered the skin. The moon became mind and entered the heart. Death became the downward breath and entered the navel. Water became seed and entered the generative organ.
Deities Enter the Body
अग्निर्वाग्भूत्वा मुखं प्राविशद्वायुः प्राणो भूत्वा नासिके प्राविशदादित्यश्चक्षुर्भूत्वाऽक्षिणी प्राविशद्दिशः श्रोत्रं भूत्वा कर्णौ प्राविशन्नोषधिवनस्पतयो लोमानि भूत्वा त्वचं प्राविशंश्चन्द्रमा मनो भूत्वा हृदयं प्राविशन्मृत्युरपानो भूत्वा नाभिं प्राविशदापो रेतो भूत्वा शिश्नं प्राविशन् ॥ ४ ॥
अग्नि वाणी बनकर मुख में प्रविष्ट हुई। वायु प्राण बनकर नासिकाओं में प्रविष्ट हुआ। सूर्य दृष्टि बनकर आँखों में प्रविष्ट हुआ। दिशाएँ श्रवण-शक्ति बनकर कानों में प्रविष्ट हुईं। औषधियाँ और वनस्पतियाँ रोम बनकर त्वचा में प्रविष्ट हुईं। चन्द्रमा मन बनकर हृदय में प्रविष्ट हुआ। मृत्यु अपान बनकर नाभि में प्रविष्ट हुई। जल वीर्य बनकर जननेन्द्रिय में प्रविष्ट हुआ।
Deities Enter the Body
अग्निर्वाग्भूत्वा मुखं प्राविशद्वायुः प्राणो भूत्वा नासिके प्राविशदादित्यश्चक्षुर्भूत्वाऽक्षिणी प्राविशद्दिशः श्रोत्रं भूत्वा कर्णौ प्राविशन्नोषधिवनस्पतयो लोमानि भूत्वा त्वचं प्राविशंश्चन्द्रमा मनो भूत्वा हृदयं प्राविशन्मृत्युरपानो भूत्वा नाभिं प्राविशदापो रेतो भूत्वा शिश्नं प्राविशन् ॥ ४ ॥
अग्नी वाणी बनून मुखात प्रवेशला. वायू प्राण बनून नाकपुड्यांत प्रवेशला. सूर्य दृष्टी बनून डोळ्यांत प्रवेशला. दिशा श्रवणशक्ती बनून कानांत प्रवेशल्या. औषधी आणि वनस्पती रोम बनून त्वचेत प्रवेशल्या. चंद्र मन बनून हृदयात प्रवेशला. मृत्यू अपान बनून नाभीत प्रवेशला. जल वीर्य बनून जननेंद्रियात प्रवेशले.