Faith Depends on Steadfastness
यदा वै निस्तिष्ठत्यथ श्रद्दधाति नानिस्तिष्ठञ्छ्रद्दधाति निस्तिष्ठन्नेव श्रद्दधाति निष्ठा त्वेव विजिज्ञासितव्येति निष्ठां भगवो विजिज्ञास इति ॥ १ ॥
'It is only when one is steadfast that one has faith; without being steadfast, one does not have faith. Only one who is steadfast has faith. But steadfastness itself must be understood.' 'Venerable one, I wish to understand steadfastness.'
Faith Depends on Steadfastness
यदा वै निस्तिष्ठत्यथ श्रद्दधाति नानिस्तिष्ठञ्छ्रद्दधाति निस्तिष्ठन्नेव श्रद्दधाति निष्ठा त्वेव विजिज्ञासितव्येति निष्ठां भगवो विजिज्ञास इति ॥ १ ॥
'जब मनुष्य निष्ठावान् होता है, तभी वह श्रद्धा रखता है; बिना निष्ठा के वह श्रद्धा नहीं रखता। जो निष्ठावान् है, वही श्रद्धा रखता है। परन्तु निष्ठा को भी समझा जाना चाहिए।' 'भगवन्, मैं निष्ठा को समझना चाहता हूँ।'
Faith Depends on Steadfastness
यदा वै निस्तिष्ठत्यथ श्रद्दधाति नानिस्तिष्ठञ्छ्रद्दधाति निस्तिष्ठन्नेव श्रद्दधाति निष्ठा त्वेव विजिज्ञासितव्येति निष्ठां भगवो विजिज्ञास इति ॥ १ ॥
'जेव्हा मनुष्य निष्ठावान असतो, तेव्हाच तो श्रद्धा ठेवतो; निष्ठेशिवाय तो श्रद्धा ठेवत नाही. जो निष्ठावान आहे, तोच श्रद्धा ठेवतो. पण निष्ठेलाही समजून घेतले पाहिजे.' 'भगवन, मला निष्ठा समजून घ्यायची आहे.'