Steadfastness Depends on Action
यदा वै करोत्यथ निस्तिष्ठति नाकृत्वा निस्तिष्ठति कृत्वैव निस्तिष्ठति कृतिस्त्वेव विजिज्ञासितव्येति कृतिं भगवो विजिज्ञास इति ॥ १ ॥
'It is only when one acts that one becomes steadfast; without acting, one does not become steadfast. Only one who acts becomes steadfast. But action itself must be understood.' 'Venerable one, I wish to understand action.'
Steadfastness Depends on Action
यदा वै करोत्यथ निस्तिष्ठति नाकृत्वा निस्तिष्ठति कृत्वैव निस्तिष्ठति कृतिस्त्वेव विजिज्ञासितव्येति कृतिं भगवो विजिज्ञास इति ॥ १ ॥
'जब मनुष्य कर्म करता है, तभी वह निष्ठा को प्राप्त होता है; बिना कर्म किए वह निष्ठा को प्राप्त नहीं होता। जो कर्म करता है, वही निष्ठा को प्राप्त होता है। परन्तु कृति को भी समझा जाना चाहिए।' 'भगवन्, मैं कृति को समझना चाहता हूँ।'
Steadfastness Depends on Action
यदा वै करोत्यथ निस्तिष्ठति नाकृत्वा निस्तिष्ठति कृत्वैव निस्तिष्ठति कृतिस्त्वेव विजिज्ञासितव्येति कृतिं भगवो विजिज्ञास इति ॥ १ ॥
'जेव्हा मनुष्य कर्म करतो, तेव्हाच तो निष्ठा प्राप्त करतो; कर्माशिवाय तो निष्ठा प्राप्त करत नाही. जो कर्म करतो, तोच निष्ठा प्राप्त करतो. पण कृतीलाही समजून घेतले पाहिजे.' 'भगवन, मला कृती समजून घ्यायची आहे.'