Swifter Than the Mind
अनेजदेकं मनसो जवीयो नैनद्देवा आप्नुवन्पूर्वमर्षत् । तद्धावतोऽन्यानत्येति तिष्ठत्तस्मिन्नपो मातरिश्वा दधाति ॥ ४ ॥
That One is unmoving, yet swifter than the mind — the senses can never overtake it, for it is always ahead. Standing still, it outruns all that run. In its presence, the very wind draws breath and all activity unfolds.
Swifter Than the Mind
अनेजदेकं मनसो जवीयो नैनद्देवा आप्नुवन्पूर्वमर्षत् । तद्धावतोऽन्यानत्येति तिष्ठत्तस्मिन्नपो मातरिश्वा दधाति ॥ ४ ॥
वह एक तत्त्व अचल होते हुए भी मन से भी अधिक वेगवान है। इन्द्रियाँ उसे कभी नहीं पा सकतीं, क्योंकि वह सदा आगे रहता है। स्थिर रहकर भी वह दौड़ने वालों से आगे निकल जाता है। उसी में वायु (जीवनशक्ति) समस्त क्रियाओं को धारण करता है।
Swifter Than the Mind
अनेजदेकं मनसो जवीयो नैनद्देवा आप्नुवन्पूर्वमर्षत् । तद्धावतोऽन्यानत्येति तिष्ठत्तस्मिन्नपो मातरिश्वा दधाति ॥ ४ ॥
ते एक तत्त्व स्थिर असूनही मनापेक्षाही वेगवान आहे. इंद्रिये त्याला कधीच गाठू शकत नाहीत, कारण ते नेहमी पुढेच असते. स्थिर राहूनही ते धावणाऱ्यांना मागे टाकते. त्याच्यातच वायू (जीवनशक्ती) सर्व क्रियांना धारण करतो.