A Flame Without Smoke
अङ्गुष्ठमात्रः पुरुषो ज्योतिरिवाधूमकः । ईशानो भूतभव्यस्य स एवाद्य स उ श्वः । एतद्वै तत् ॥ १३ ॥
The Person, of the size of a thumb, is like a flame without smoke, the ruler of what has been and what is yet to come. He is the same today and the same tomorrow. This, indeed, is That.
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A Flame Without Smoke
अङ्गुष्ठमात्रः पुरुषो ज्योतिरिवाधूमकः । ईशानो भूतभव्यस्य स एवाद्य स उ श्वः । एतद्वै तत् ॥ १३ ॥
अंगूठे के बराबर पुरुष धुआंरहित ज्योति के समान है, जो भूत और भविष्य का स्वामी है। वह आज भी वही है और कल भी वही रहेगा। यही वह तत्व है।
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A Flame Without Smoke
अङ्गुष्ठमात्रः पुरुषो ज्योतिरिवाधूमकः । ईशानो भूतभव्यस्य स एवाद्य स उ श्वः । एतद्वै तत् ॥ १३ ॥
अंगठ्याएवढा पुरुष धूररहित ज्योतीसारखा आहे, जो भूत आणि भविष्याचा स्वामी आहे. तो आजही तोच आहे आणि उद्याही तोच राहील. हेच ते तत्त्व आहे.
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