Beyond the Reach of Reasoning
न नरेणावरेण प्रोक्त एष सुविज्ञेयो बहुधा चिन्त्यमानः । अनन्यप्रोक्ते गतिरत्र नास्ति अणीयान् ह्यतर्क्यमणुप्रमाणात् ॥ ८ ॥
This truth, when taught by an inferior person, cannot be rightly understood, however much it is pondered. Unless taught by one who sees it as one with oneself, there is no way to it, for it is subtler than reasoning can reach.
Beyond the Reach of Reasoning
न नरेणावरेण प्रोक्त एष सुविज्ञेयो बहुधा चिन्त्यमानः । अनन्यप्रोक्ते गतिरत्र नास्ति अणीयान् ह्यतर्क्यमणुप्रमाणात् ॥ ८ ॥
किसी सामान्य व्यक्ति द्वारा कहे जाने पर यह तत्व चाहे जितना विचार करने पर भी सम्यक् रूप से समझ में नहीं आता। जब तक इसे अभिन्न रूप से जानने वाला न सिखाए, तब तक इसका कोई मार्ग नहीं है, क्योंकि यह तर्क की पहुंच से भी सूक्ष्म है।
Beyond the Reach of Reasoning
न नरेणावरेण प्रोक्त एष सुविज्ञेयो बहुधा चिन्त्यमानः । अनन्यप्रोक्ते गतिरत्र नास्ति अणीयान् ह्यतर्क्यमणुप्रमाणात् ॥ ८ ॥
सामान्य माणसाने सांगितल्यास हे तत्त्व कितीही विचार केला तरी नीट समजत नाही. जोपर्यंत याला अभिन्न रूपात जाणणारा शिकवत नाही, तोपर्यंत याचा मार्ग नाही, कारण हे तर्काच्याही पलीकडचे सूक्ष्म आहे.