One Fire, Many Forms
अग्निर्यथैको भुवनं प्रविष्टो रूपं रूपं प्रतिरूपो बभूव । एकस्तथा सर्वभूतान्तरात्मा रूपं रूपं प्रतिरूपो बहिश्च ॥ ९ ॥
As fire, though one, having entered the world, takes a different form according to whatever it burns, so the one Self within all beings takes a form according to each, and yet remains beyond them all.
One Fire, Many Forms
अग्निर्यथैको भुवनं प्रविष्टो रूपं रूपं प्रतिरूपो बभूव । एकस्तथा सर्वभूतान्तरात्मा रूपं रूपं प्रतिरूपो बहिश्च ॥ ९ ॥
जैसे एक ही अग्नि जगत में प्रवेश करके हर वस्तु के अनुसार भिन्न-भिन्न रूप धारण कर लेती है, वैसे ही सभी प्राणियों के भीतर स्थित एक ही आत्मा हर प्राणी के अनुसार रूप धारण करती है, फिर भी उन सबसे परे रहती है।
One Fire, Many Forms
अग्निर्यथैको भुवनं प्रविष्टो रूपं रूपं प्रतिरूपो बभूव । एकस्तथा सर्वभूतान्तरात्मा रूपं रूपं प्रतिरूपो बहिश्च ॥ ९ ॥
जशी एकच अग्नी जगात प्रवेश करून प्रत्येक वस्तूनुसार वेगवेगळे रूप धारण करते, तसाच सर्व प्राण्यांच्या आत असलेला एकच आत्मा प्रत्येक प्राण्यानुसार रूप धारण करतो, तरीही त्या सर्वांच्या पलीकडे राहतो.