Seen as in a Mirror, a Dream, in Water
यथाऽऽदर्शे तथाऽऽत्मनि यथा स्वप्ने तथा पितृलोके । यथाऽप्सु परीव ददृशे तथा गन्धर्वलोके छायातपयोरिव ब्रह्मलोके ॥ ५ ॥
As in a mirror, so it is seen in the self; as in a dream, so in the world of the ancestors; as somewhat faintly in water, so in the world of the Gandharvas; as light and shadow, so in the world of Brahman.
Seen as in a Mirror, a Dream, in Water
यथाऽऽदर्शे तथाऽऽत्मनि यथा स्वप्ने तथा पितृलोके । यथाऽप्सु परीव ददृशे तथा गन्धर्वलोके छायातपयोरिव ब्रह्मलोके ॥ ५ ॥
जैसे दर्पण में, वैसे ही आत्मा में यह दिखाई देता है; जैसे स्वप्न में, वैसे ही पितृलोक में; जैसे जल में कुछ धुंधला-सा दिखता है, वैसे ही गंधर्वलोक में; और जैसे छाया और धूप, वैसे ही ब्रह्मलोक में।
Seen as in a Mirror, a Dream, in Water
यथाऽऽदर्शे तथाऽऽत्मनि यथा स्वप्ने तथा पितृलोके । यथाऽप्सु परीव ददृशे तथा गन्धर्वलोके छायातपयोरिव ब्रह्मलोके ॥ ५ ॥
जसे आरशात, तसेच आत्म्यात हे दिसते; जसे स्वप्नात, तसेच पितृलोकात; जसे पाण्यात काहीसे अस्पष्ट दिसते, तसेच गंधर्वलोकात; आणि जसे छाया आणि ऊन, तसेच ब्रह्मलोकात.