The Steady Holding Called Yoga
तां योगमिति मन्यन्ते स्थिरामिन्द्रियधारणाम् । अप्रमत्तस्तदा भवति योगो हि प्रभवाप्ययौ ॥ ११ ॥
This steady holding of the senses they call Yoga. Then one becomes vigilant, for Yoga itself is subject to both arising and passing away.
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The Steady Holding Called Yoga
तां योगमिति मन्यन्ते स्थिरामिन्द्रियधारणाम् । अप्रमत्तस्तदा भवति योगो हि प्रभवाप्ययौ ॥ ११ ॥
इंद्रियों की इस स्थिर धारणा को योग कहते हैं। तब मनुष्य सावधान हो जाता है, क्योंकि योग उत्पत्ति और नाश दोनों के अधीन है।
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The Steady Holding Called Yoga
तां योगमिति मन्यन्ते स्थिरामिन्द्रियधारणाम् । अप्रमत्तस्तदा भवति योगो हि प्रभवाप्ययौ ॥ ११ ॥
इंद्रियांच्या या स्थिर धारणेला योग म्हणतात. तेव्हा माणूस सावध होतो, कारण योग उत्पत्ती आणि नाश या दोहोंच्या अधीन आहे.
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