The Swan Dwelling Everywhere
हंसः शुचिषद्वसुरन्तरिक्षसद्धोता वेदिषदतिथिर्दुरोणसत् । नृषद्वरसदृतसद्व्योमसदब्जा गोजा ऋतजा अद्रिजा ऋतं बृहत् ॥ २ ॥
Dwelling as the pure swan in heaven, as the Vasu in mid-air, as the priest at the altar, as the guest in the house; dwelling among men, in the highest place, in truth, in the sky; born of water, born of earth, born of sacred rite, born of the mountain — this is the great truth.
The Swan Dwelling Everywhere
हंसः शुचिषद्वसुरन्तरिक्षसद्धोता वेदिषदतिथिर्दुरोणसत् । नृषद्वरसदृतसद्व्योमसदब्जा गोजा ऋतजा अद्रिजा ऋतं बृहत् ॥ २ ॥
जो हंस के रूप में स्वर्ग में, वसु के रूप में अंतरिक्ष में, होता के रूप में वेदी पर, अतिथि के रूप में घर में, मनुष्यों में, श्रेष्ठ स्थान में, सत्य में, आकाश में निवास करता है; जो जल से, पृथ्वी से, यज्ञ से, पर्वत से उत्पन्न हुआ - वही महान सत्य है।
The Swan Dwelling Everywhere
हंसः शुचिषद्वसुरन्तरिक्षसद्धोता वेदिषदतिथिर्दुरोणसत् । नृषद्वरसदृतसद्व्योमसदब्जा गोजा ऋतजा अद्रिजा ऋतं बृहत् ॥ २ ॥
जो हंसाच्या रूपात स्वर्गात, वसूच्या रूपात अंतराळात, होत्याच्या रूपात वेदीवर, अतिथीच्या रूपात घरात, माणसांमध्ये, श्रेष्ठ स्थानी, सत्यात, आकाशात वास करतो; जो जलापासून, पृथ्वीपासून, यज्ञापासून, पर्वतापासून उत्पन्न झाला - तेच महान सत्य आहे.