Turning the Gaze Inward
पराञ्चि खानि व्यतृणत् स्वयम्भूस्तस्मात्पराङ्पश्यति नान्तरात्मन् । कश्चिद्धीरः प्रत्यगात्मानमैक्षदावृत्तचक्षुरमृतत्वमिच्छन् ॥ १ ॥
The self-existent Lord pierced the openings of the senses outward; therefore one looks outward, not within oneself. But a certain wise person, desiring immortality, turned his sight inward and beheld the indwelling Self.
Turning the Gaze Inward
पराञ्चि खानि व्यतृणत् स्वयम्भूस्तस्मात्पराङ्पश्यति नान्तरात्मन् । कश्चिद्धीरः प्रत्यगात्मानमैक्षदावृत्तचक्षुरमृतत्वमिच्छन् ॥ १ ॥
स्वयंभू ने इंद्रियों के द्वार बाहर की ओर बनाए, इसलिए मनुष्य बाहर देखता है, अंतरात्मा को नहीं। परंतु किसी धीर पुरुष ने अमरत्व की इच्छा से अपनी दृष्टि भीतर की ओर मोड़कर प्रत्यक् आत्मा को देखा।
Turning the Gaze Inward
पराञ्चि खानि व्यतृणत् स्वयम्भूस्तस्मात्पराङ्पश्यति नान्तरात्मन् । कश्चिद्धीरः प्रत्यगात्मानमैक्षदावृत्तचक्षुरमृतत्वमिच्छन् ॥ १ ॥
स्वयंभूने इंद्रियांची द्वारे बाहेरच्या दिशेने बनवली, म्हणून माणूस बाहेर पाहतो, अंतरात्म्याकडे नाही. पण एखाद्या धीर पुरुषाने अमरत्वाच्या इच्छेने आपली दृष्टी आत वळवून प्रत्यक् आत्मा पाहिला.