Realized in Every Awareness
प्रतिबोधविदितं मतममृतत्वं हि विन्दते । आत्मना विन्दते वीर्यं विद्यया विन्दतेऽमृतम् ॥ ४॥
It is truly known when it is recognized within every act of awareness, for through this recognition one attains immortality. Through the Self one attains true strength, and through this knowledge one attains immortality.
Realized in Every Awareness
प्रतिबोधविदितं मतममृतत्वं हि विन्दते । आत्मना विन्दते वीर्यं विद्यया विन्दतेऽमृतम् ॥ ४॥
यह हर बोध में पहचाना जाने पर ही सचमुच ज्ञात होता है, क्योंकि इसी पहचान से अमरत्व प्राप्त होता है। आत्मा के द्वारा सच्चा बल प्राप्त होता है, और इस ज्ञान के द्वारा अमरत्व प्राप्त होता है।
Realized in Every Awareness
प्रतिबोधविदितं मतममृतत्वं हि विन्दते । आत्मना विन्दते वीर्यं विद्यया विन्दतेऽमृतम् ॥ ४॥
हे प्रत्येक जाणिवेत ओळखले गेल्यावरच खऱ्या अर्थाने ज्ञात होते, कारण याच ओळखीमुळे अमरत्व प्राप्त होते. आत्म्याद्वारे खरे बळ प्राप्त होते आणि या ज्ञानाद्वारे अमरत्व प्राप्त होते.