That Which Hears the Ear
यच्छ्रोत्रेण न शृणोति येन श्रोत्रमिदं श्रुतम् । तदेव ब्रह्म त्वं विद्धि नेदं यदिदमुपासते ॥ ८॥
That which the ear cannot hear, but by which this power of hearing is itself heard — know that alone to be Brahman, not this which people worship here.
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That Which Hears the Ear
यच्छ्रोत्रेण न शृणोति येन श्रोत्रमिदं श्रुतम् । तदेव ब्रह्म त्वं विद्धि नेदं यदिदमुपासते ॥ ८॥
जिसे कान नहीं सुन सकता, परन्तु जिसके द्वारा यह श्रवण-शक्ति स्वयं सुनी जाती है - उसे ही ब्रह्म जानो, न कि इसे जिसकी लोग यहाँ उपासना करते हैं।
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That Which Hears the Ear
यच्छ्रोत्रेण न शृणोति येन श्रोत्रमिदं श्रुतम् । तदेव ब्रह्म त्वं विद्धि नेदं यदिदमुपासते ॥ ८॥
ज्याला कान ऐकू शकत नाही, परंतु ज्याच्यामुळे ही ऐकण्याची शक्ती स्वतः ऐकली जाते - तेच ब्रह्म आहे असे जाण, हे नव्हे ज्याची लोक इथे उपासना करतात.
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