Nearer Than the Nearest
बृहच्च तद्दिव्यमचिन्त्यरूपं सूक्ष्माच्च तत्सूक्ष्मतरं विभाति । दूरात्सुदूरे तदिहान्तिके च पश्यत्स्विहैव निहितं गुहायाम् ॥ ७ ॥
That reality is vast and divine, its form beyond thought; it shines forth, subtler than the subtlest. Farther than the farthest, yet closer than the closest — it is hidden within the cave of the heart, for those with eyes to see it here.
Nearer Than the Nearest
बृहच्च तद्दिव्यमचिन्त्यरूपं सूक्ष्माच्च तत्सूक्ष्मतरं विभाति । दूरात्सुदूरे तदिहान्तिके च पश्यत्स्विहैव निहितं गुहायाम् ॥ ७ ॥
वह विशाल और दिव्य है, उसका रूप अचिन्त्य है; वह सूक्ष्म से भी सूक्ष्मतर होकर प्रकाशित होता है। वह दूर से भी दूर है, फिर भी यहीं अत्यंत निकट है — देखने वालों के लिए वह हृदय-गुहा में ही स्थित है।
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बृहच्च तद्दिव्यमचिन्त्यरूपं सूक्ष्माच्च तत्सूक्ष्मतरं विभाति । दूरात्सुदूरे तदिहान्तिके च पश्यत्स्विहैव निहितं गुहायाम् ॥ ७ ॥
ते विशाल आणि दिव्य आहे, त्याचे रूप अचिंत्य आहे; ते सूक्ष्माहूनही सूक्ष्मतर होऊन प्रकाशते. ते दूरातही दूर आहे, तरीही इथेच अत्यंत जवळ आहे — पाहणाऱ्यांसाठी ते हृदयगुहेतच स्थित आहे.