Oceans, Mountains, and Rivers
अतः समुद्रा गिरयश्च सर्वेऽस्मात्स्यन्दन्ते सिन्धवः सर्वरूपाः । अतश्च सर्वा ओषधयो रसश्च येनैष भूतैस्तिष्ठते ह्यन्तरात्मा ॥ ९ ॥
From him come all the oceans and mountains, and from him flow rivers of every kind; from him too come all plants and their essence, by which this inner Self dwells amid the material elements.
Oceans, Mountains, and Rivers
अतः समुद्रा गिरयश्च सर्वेऽस्मात्स्यन्दन्ते सिन्धवः सर्वरूपाः । अतश्च सर्वा ओषधयो रसश्च येनैष भूतैस्तिष्ठते ह्यन्तरात्मा ॥ ९ ॥
उससे ही सभी समुद्र और पर्वत उत्पन्न होते हैं, उसी से सब प्रकार की नदियाँ बहती हैं। उसी से समस्त वनस्पतियाँ और उनका रस उत्पन्न होता है, जिनके द्वारा यह अन्तरात्मा भूतों में स्थित रहती है।
Oceans, Mountains, and Rivers
अतः समुद्रा गिरयश्च सर्वेऽस्मात्स्यन्दन्ते सिन्धवः सर्वरूपाः । अतश्च सर्वा ओषधयो रसश्च येनैष भूतैस्तिष्ठते ह्यन्तरात्मा ॥ ९ ॥
त्याच्यापासूनच सर्व समुद्र आणि पर्वत उत्पन्न होतात, त्याच्यापासूनच सर्व प्रकारच्या नद्या वाहतात. त्याच्यापासूनच सर्व वनस्पती आणि त्यांचा रस उत्पन्न होतो, ज्यांच्याद्वारे हा अंतरात्मा भूतांमध्ये स्थित राहतो.