Untying the Knot of Ignorance
पुरुष एवेदं विश्वं कर्म तपो ब्रह्म परामृतम् । एतद्यो वेद निहितं गुहायां सोऽविद्याग्रन्थिं विकिरतीह सोम्य ॥ १० ॥
The Supreme Person alone is all this — every action, every austerity, Brahman itself, the highest immortality. Whoever knows this, hidden in the cave of the heart, cuts through the knot of ignorance, here and now, dear one.
Untying the Knot of Ignorance
पुरुष एवेदं विश्वं कर्म तपो ब्रह्म परामृतम् । एतद्यो वेद निहितं गुहायां सोऽविद्याग्रन्थिं विकिरतीह सोम्य ॥ १० ॥
यह सम्पूर्ण विश्व, कर्म, तप, ब्रह्म और परम अमृत — सब कुछ पुरुष ही है। जो हृदय-गुहा में स्थित इसे जानता है, वह यहीं अविद्या की गाँठ को खोल देता है, हे सौम्य।
Untying the Knot of Ignorance
पुरुष एवेदं विश्वं कर्म तपो ब्रह्म परामृतम् । एतद्यो वेद निहितं गुहायां सोऽविद्याग्रन्थिं विकिरतीह सोम्य ॥ १० ॥
हे संपूर्ण विश्व, कर्म, तप, ब्रह्म आणि परम अमृत — हे सर्व पुरुषच आहे. जो हृदयगुहेत स्थित हे जाणतो, तो इथेच अज्ञानाची गाठ सोडवतो, हे सौम्या.