Where Desires Dissolve
कामान् यः कामयते मन्यमानः स कामभिर्जायते तत्र तत्र । पर्याप्तकामस्य कृतात्मनस्तु इहैव सर्वे प्रविलीयन्ति कामाः ॥ २ ॥
One who cherishes desires, dwelling on them, is born again and again wherever those desires lead. But for one whose self is fulfilled and perfected, all desires dissolve away, right here.
Where Desires Dissolve
कामान् यः कामयते मन्यमानः स कामभिर्जायते तत्र तत्र । पर्याप्तकामस्य कृतात्मनस्तु इहैव सर्वे प्रविलीयन्ति कामाः ॥ २ ॥
जो व्यक्ति कामनाओं का चिंतन करते हुए उन्हें चाहता है, वह उन्हीं कामनाओं के अनुसार बार-बार जन्म लेता है। परन्तु जिसकी आत्मा कृतार्थ और पूर्ण हो चुकी है, उसकी सारी कामनाएँ यहीं विलीन हो जाती हैं।
Where Desires Dissolve
कामान् यः कामयते मन्यमानः स कामभिर्जायते तत्र तत्र । पर्याप्तकामस्य कृतात्मनस्तु इहैव सर्वे प्रविलीयन्ति कामाः ॥ २ ॥
जो व्यक्ती कामनांचे चिंतन करत त्यांना इच्छितो, तो त्याच कामनांनुसार वारंवार जन्म घेतो. परंतु ज्याचा आत्मा कृतार्थ आणि पूर्ण झाला आहे, त्याच्या सर्व कामना इथेच विलीन होतात.