A Year of Discipline First
तान्ह स ऋषिरुवाच भूय एव तपसा ब्रह्मचर्येण श्रद्धया संवत्सरं संवत्स्यथ यथाकामं प्रश्नान् पृच्छत यदि विज्ञास्यामः सर्वं ह वो वक्ष्याम इति ॥ २ ॥
The sage said to them, "Live with me for one more year, practicing austerity, celibacy, and faith. Then ask whatever questions you wish. If we know the answers, we will tell you everything."
A Year of Discipline First
तान्ह स ऋषिरुवाच भूय एव तपसा ब्रह्मचर्येण श्रद्धया संवत्सरं संवत्स्यथ यथाकामं प्रश्नान् पृच्छत यदि विज्ञास्यामः सर्वं ह वो वक्ष्याम इति ॥ २ ॥
ऋषि ने उनसे कहा, "तपस्या, ब्रह्मचर्य और श्रद्धा के साथ एक वर्ष और मेरे साथ रहो। फिर जो चाहो पूछना, यदि हम जानते होंगे तो सब कुछ बता देंगे।"
A Year of Discipline First
तान्ह स ऋषिरुवाच भूय एव तपसा ब्रह्मचर्येण श्रद्धया संवत्सरं संवत्स्यथ यथाकामं प्रश्नान् पृच्छत यदि विज्ञास्यामः सर्वं ह वो वक्ष्याम इति ॥ २ ॥
ऋषींनी त्यांना सांगितले, "तप, ब्रह्मचर्य आणि श्रद्धेने आणखी एक वर्ष माझ्यासोबत राहा. मग तुम्हाला हवे ते प्रश्न विचारा. आम्हाला माहीत असेल तर आम्ही सर्व काही सांगू."