The Power of the Final Thought
यच्चित्तस्तेनैष प्राणमायाति । प्राणस्तेजसा युक्तः सहात्मना तथासङ्कल्पितं लोकं नयति ॥ १० ॥
With whatever thought a person's mind is occupied, with that he enters into life-breath at death; and life-breath, joined with heat, together with the self, leads him to whatever world he has conceived in thought.
The Power of the Final Thought
यच्चित्तस्तेनैष प्राणमायाति । प्राणस्तेजसा युक्तः सहात्मना तथासङ्कल्पितं लोकं नयति ॥ १० ॥
व्यक्ति का चित्त जिस विचार में लीन होता है, उसी के साथ वह प्राण में प्रवेश करता है; और प्राण, तेज के साथ मिलकर, आत्मा सहित, उस लोक में ले जाता है जिसकी उसने कल्पना की थी।
The Power of the Final Thought
यच्चित्तस्तेनैष प्राणमायाति । प्राणस्तेजसा युक्तः सहात्मना तथासङ्कल्पितं लोकं नयति ॥ १० ॥
माणसाचे चित्त ज्या विचारात लीन असते, त्याच्यासोबतच तो प्राणात प्रवेश करतो; आणि प्राण, तेजासह, आत्म्यासकट, त्याने कल्पिलेल्या लोकात घेऊन जातो.