Bliss is Brahman, the Final Truth
आनन्दो ब्रह्मेति व्यजानात् । आनन्दाद्ध्येव खल्विमानि भूतानि जायन्ते । आनन्देन जातानि जीवन्ति । आनन्दं प्रयन्त्यभिसंविशन्तीति । सैषा भार्गवी वारुणी विद्या । परमे व्योमन्प्रतिष्ठिता । स य एवं वेद प्रतितिष्ठति । अन्नवानन्नादो भवति । महान्भवति प्रजया पशुभिर्ब्रह्मवर्चसेन । महान् कीर्त्या ॥ १ ॥
Bhrigu understood that bliss is Brahman. For truly, from bliss all these beings are born; by bliss, once born, they live; and into bliss they depart and merge. This is the knowledge that Bhrigu gained from his father Varuna, established in the highest heaven. Whoever knows this becomes firmly established; he becomes rich in food and a master of food. He becomes great through offspring, through cattle, through the splendor of sacred wisdom, and great through fame.
Bliss is Brahman, the Final Truth
आनन्दो ब्रह्मेति व्यजानात् । आनन्दाद्ध्येव खल्विमानि भूतानि जायन्ते । आनन्देन जातानि जीवन्ति । आनन्दं प्रयन्त्यभिसंविशन्तीति । सैषा भार्गवी वारुणी विद्या । परमे व्योमन्प्रतिष्ठिता । स य एवं वेद प्रतितिष्ठति । अन्नवानन्नादो भवति । महान्भवति प्रजया पशुभिर्ब्रह्मवर्चसेन । महान् कीर्त्या ॥ १ ॥
भृगु ने समझा कि आनन्द ही ब्रह्म है। क्योंकि आनन्द से ही ये सब प्राणी उत्पन्न होते हैं; आनन्द से ही जन्म लेकर वे जीते हैं; और आनन्द में ही वे लौटकर विलीन होते हैं। यही वह विद्या है जो भृगु ने अपने पिता वरुण से प्राप्त की, जो परम आकाश में प्रतिष्ठित है। जो इसे जानता है, वह सुदृढ़ रूप से प्रतिष्ठित हो जाता है; वह अन्नवान और अन्न का स्वामी बन जाता है। वह सन्तान, पशु, ब्रह्मतेज और कीर्ति से महान बन जाता है।
Bliss is Brahman, the Final Truth
आनन्दो ब्रह्मेति व्यजानात् । आनन्दाद्ध्येव खल्विमानि भूतानि जायन्ते । आनन्देन जातानि जीवन्ति । आनन्दं प्रयन्त्यभिसंविशन्तीति । सैषा भार्गवी वारुणी विद्या । परमे व्योमन्प्रतिष्ठिता । स य एवं वेद प्रतितिष्ठति । अन्नवानन्नादो भवति । महान्भवति प्रजया पशुभिर्ब्रह्मवर्चसेन । महान् कीर्त्या ॥ १ ॥
भृगूंनी समजून घेतले की आनंदच ब्रह्म आहे. कारण आनंदामुळेच हे सर्व प्राणी उत्पन्न होतात; आनंदामुळेच जन्मल्यावर ते जगतात; आणि आनंदातच ते परत विलीन होतात. हीच ती विद्या आहे जी भृगूंनी आपल्या वडिलांकडून, वरुणाकडून प्राप्त केली, जी परम आकाशात प्रतिष्ठित आहे. जो हे जाणतो, तो दृढपणे प्रतिष्ठित होतो; तो अन्नवान आणि अन्नाचा स्वामी बनतो. तो संतती, पशु, ब्रह्मतेज आणि कीर्तीने महान बनतो.