Brahman Known Through the Body
य एवं वेद । क्षेम इति वाचि । योगक्षेम इति प्राणापानयोः । कर्मेति हस्तयोः । गतिरिति पादयोः । विमुक्तिरिति पायौ । इति मानुषीः समाज्ञाः । अथ दैवीः । तृप्तिरिति वृष्टौ । बलमिति विद्युति ॥ २ ॥
Whoever knows this: Brahman is security in speech, acquisition and security in the in-breath and out-breath, action in the hands, movement in the feet, elimination in the organ of excretion — these are the human ways of recognizing Brahman. Now the divine ways: satisfaction in rain, strength in lightning —
Brahman Known Through the Body
य एवं वेद । क्षेम इति वाचि । योगक्षेम इति प्राणापानयोः । कर्मेति हस्तयोः । गतिरिति पादयोः । विमुक्तिरिति पायौ । इति मानुषीः समाज्ञाः । अथ दैवीः । तृप्तिरिति वृष्टौ । बलमिति विद्युति ॥ २ ॥
जो यह जानता है — वाणी में सुरक्षा रूप में ब्रह्म है, प्राण-अपान में प्राप्ति और सुरक्षा रूप में, हाथों में कर्म रूप में, पैरों में गति रूप में, गुदा में मल-त्याग रूप में — ये ब्रह्म को पहचानने के मानवीय तरीके हैं। अब दैवीय तरीके — वर्षा में तृप्ति रूप में, बिजली में बल रूप में —
Brahman Known Through the Body
य एवं वेद । क्षेम इति वाचि । योगक्षेम इति प्राणापानयोः । कर्मेति हस्तयोः । गतिरिति पादयोः । विमुक्तिरिति पायौ । इति मानुषीः समाज्ञाः । अथ दैवीः । तृप्तिरिति वृष्टौ । बलमिति विद्युति ॥ २ ॥
जो हे जाणतो — वाणीत सुरक्षा रूपात ब्रह्म आहे, प्राण-अपानात प्राप्ती आणि सुरक्षा रूपात, हातांत कर्म रूपात, पायांत गती रूपात, गुदद्वारात मलत्याग रूपात — हे ब्रह्माला ओळखण्याचे मानवी मार्ग आहेत. आता दैवी मार्ग — पावसात तृप्ती रूपात, विजेत बल रूपात —